ऋग्वेद: सफलता चाहते है तो कभी न करें ये 2 काम

कई लोगों की आदत होती है दूसरों की बुराई करना या उनमें कोई कमी निकालकर उनका अपमान करना। ये दोनों ही काम हमें पतन की ओर ले जाते हैं। निंदा करना और अपमानित करना, इन दोनों कामों को ही हमारे शास्त्रों ने बहुत बड़ी बुराई माना है। इनको करने वाला इंसान अक्सर अपने मूल काम को भूल जाता है और बाकी लोगों से पीछे रह जाता है। अगर सफलता की राह में आगे बढ़ना हो तो दूसरों की बुराई और अपमान करने से हमेशा बचना चाहिए।
निंदा मतलब दूसरों के कामों में दोष ढूंढ़ना। दूसरों की बुराई करना आज–कल कई लोगों की आदत बन चुकी है। हर मनुष्य दूसरे में कोई न कोई दोष ढूंढ़ता ही रहता है। ऋग्वेद में कहा गया है कि दूसरों की निंदा करने से दूसरों का नहीं बल्कि खुद का ही नुकसान होता है। निंदा से ही मनुष्य की बर्बादी की शुरुआत होती है। ऐसे व्यक्ति अन्य लोगों के सामने किसी को बुरा साबित करने के लिए चोरी, हिंसा जैसे काम करने में भी नहीं कतराते।

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