लेड से नर्वस सिस्टम और किडनी पर खतरा

नई दिल्ली

मैगी में पाए गए लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) आपके सेहत के लिए खतरनाक हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लेड की वजह से किडनी खराब हो सकती है और नर्वस सिस्टम डैमेज हो सकता है।

चिंता की बात यह है कि दिल्ली में मैगी के जांच में 13 में से 10 सैंपल्स में लेड ज्यादा पाया गया है और लेड की वजह से ही सरकार ने मैगी की बिक्री पर रोक लगाई है। लेड टॉक्सिक सब्सटेंस है। दिल्ली में लेड की औसत मात्रा 3.5 पीपीएम तक पाई गई है, जबकि तय मानक के अनुसार के किसी फूड प्रॉडक्ट में लेड की मात्रा 2.5 पीपीएम तक ही होनी चाहिए।

मैक्स की डायटिशन डॉक्टर रीतिका समादार ने बताया कि लेड एक टॉक्सिक मेटल है और यह एमएसजी से भी ज्यादा खतरनाक है। डॉक्टर रीतिका का कहना है कि अगर बॉडी में अधिक मात्रा में लेड शामिल हो जाए तो इसकी वजह से न्यूरोलॉजिकल परेशानी हो सकती है। इसकी वजह से ब्रेन के नर्वस सिस्टम पर असर होता है। यही नहीं लेड ब्लड सप्लाई को भी प्रभावित करता है। यही नहीं डॉक्टर का कहना है कि इसकी वजह से किडनी की बीमारी होने का खतरा रहता है और लंबे समय के यूज के बाद किडनी फेल तक हो सकती है।

अल्जाइमर्स का खतरा
एम्स की डायटिशन अंजली भोला का कहना है कि लेड खतरनाक है, क्योंकि इसका इफेक्ट सीधे नर्व और किडनी पर होता है। अगर नर्व डैमेज हो जाए तो इम्यून सिस्टम से लेकर अल्जाइमर्स, पार्किनसन, किडनी डिजीज हो सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह सभी बीमारी जानलेवा और खतरनाक है, इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

ऊपर से मिलाया जाता है एमएसजी
डॉक्टर रीतिका ने कहा कि जहां तक एमएसजी की बात है तो एमएसजी फूड प्रॉडक्ट में ऊपर से मिलाया जाता है ताकि टेस्ट का फ्लेवर बेहतर हो। किसी फूड में लेड ऊपर से नहीं मिलाया जाता है। अगर किसी भी प्रॉडक्ट में लेड पाया जाता है तो यह जांच का विषय है, क्योंकि आमतौर पर लेड इंडस्ट्रियल वेस्ट, पानी या मिट्टी में पाया जाता है। अगर यह बड़े लेवल पर पाया जा रहा है तो निश्चित रूप से इसकी जांच की जानी चाहिए। इस बारे एम्स की अंजली भोला कहती हैं कि लेड वातावरण में है और अगर मिट्टी में यह लेड हो और उस मिट्टी का यूज खेती में हो तो वह अनाज में चला जाता है और वही अनाज अगर प्रॉडक्ट बनाने में यूज किया जाए तो लेड प्रॉडक्ट में भी चला जाएगा

प्रॉडक्ट की जांच करना जरूरी
अंजली का कहना है कि अगर मेरा कोई प्रॉडक्ट है तो मेरा फर्ज बनता है कि हम प्रॉडक्ट की जांच कराएं। तय मानक के अनुसार कैलोरी, प्रोटीन, आयरन, लेड की मात्रा हो। अगर मात्रा इससे ज्यादा हो रही है तो सेल ड्रॉप करना चाहिए। डॉक्टर रीतिका ने कहा कि सेफ्टी रेगूलेशन बोर्ड को अलर्ट रहने की जरूरत है। साथ ही कंपनियों को भी समय-समय अपने प्रॉडक्ट की जांच कराते रहना चाहिए, ताकि किसी के सेहत को नुकसान न पहुंचे।

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