समस्या का हल

Thomas Edison

यह उन दिनों की बात है जब प्रख्यात वैज्ञानिक थॉमस एडिसन फोनोग्राफ बनाने में व्यस्त थे। इस काम से जुड़े कुछ हिस्से उन्होंने एक सहायक को सौंप दिए थे ताकि वह मुख्य लक्ष्य पर खुद को केंद्रित कर सकें। दो साल तक काम करने के बाद एडिसन का सहायक उनके पास आया और बोला, ‘ मिस्टर एडिसन! मैंने आपके हजारों डॉलर और अपने जीवन के दो साल इस काम में खपा दिए हैं पर परिणाम कुछ भी नहीं निकला। और लगता भी नहीं कि मुझसे कुछ हो पाएगा। आपकी जगह अगर कोई और होता तो मुझे कब का निकाल चुका होता और मैं भी कब का निकल लेता। पर अब मुझे अहसास होने लगा है कि मैं आपके साथ अन्याय कर रहा हूं। अब मैं इस्तीफा देना चाहता हूं।’यह कहते हुए उसने अपना इस्तीफा पत्र एडिसन की मेज पर रख दिया और विनम्रतापूर्वक बोला, ‘सर, कृपया मेरा इस्तीफा स्वीकार कीजिए।’

एडिसन ने झटके में इस्तीफा पत्र उठाया और फाड़ दिया। फिर अपने चिर-परिचित अंदाज में बोले, ‘मैं तुम्हारा इस्तीफा नामंजूर करता हूं।’क्षण भर रुक कर कुछ सोचने के बाद एडिसन ने अपने सहायक से कहा, ‘ दोस्त, मेरा विश्वास है कि अगर समस्या है तो उसका कोई न कोई हल भी होगा। दरअसल हल हमारे पास ही होता है, पर हम उसे देख नहीं पाते। इसलिए तुम जिस काम में जुटे हो उसमें लगे रहो। किसी न किसी दिन समाधान मिलेगा। वापस जाकर अपने काम में लग जाओ।’ एडिसन के प्रेरणा भरे शब्दों ने उनके सहायक का विश्वास मजबूत कर दिया। वह दोगुने उत्साह से काम में लग गया। एडिसन ने कुछ दिनों बाद फोनोग्राफ बना लिया। इसमें उस सहायक का भी योगदान था।

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